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राजनीति में शिष्टता के लिए तरस रहे गुरु!

अमृतसर: राजनीति में शिष्टता के लिए तरस रहे गुरू की कांग्रेस पार्टी से छुट्टी लगभग तय हो गई है। जेटली से जलील होकर कमल छोड़, हाथ से हाथ मिलाने वाले नवजोत सिंह सिद्धू का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। जिसके बाद उनके सहयोगी भी उनके विरोधी में तबदील हो गए हैं। जी हां, सिधु का इस्तीफा मंज़ूर होने के बाद किसी समय नवजोत के साथी रहे पूर्व स्थानीय मंत्री अनिल जोशी ने नवजोत की रावण से तुलना करते हुए उन्हें अंहकारी बताया।

जोशी ने कहा कि, सिद्ध को नही भूलना चाहिए कि किसको कौन सा विभाग देना है, यह मुख्यमंत्री का फैसला होता है। इसके साथ ही नवजोत के काम पर सवाल उठाते हुए जोशी ने उनके काम को जीरो पर्फोर्मेन्स बताया। नवजोत सिंह सिद्धु पर ढोंगी व्यक्ति होने का आरोप लगाते हुए जोशी ने कहा कि, वो कहता कुछ और है और करता कुछ और...सिद्धू को चाहिए के वो बैंस बंधुओं के साथ चल जाए...क्योंकि अब प्रमुख पार्टियों में उनके लिए कोई जगह नही है।

खैर पूर्व स्थानीय मंत्री अनिल जोशी ने तो सिद्धू पर निशाना साध दिया लेकिन इस परर सिद्धु क्या पलवार करते हैं, ये देखना दिलचस्प होगा। बता दें कि पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू सियासी की पिच पर कांग्रेस से पहले बीजेपी के लिए बल्लेबाजी किया करते थे। लेकिन बीजेपी में मान-सम्मान की कमी के कारण सिद्धू ने बीजेपी छोड़ कांग्रेस से हाथ मिलाया, लेकिन अब ऐसा लगता है जैसे कांग्रेस से भी सिद्धू का मन भर चुका है।

दरअसल, पंजाब सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और सिद्धू का विवाद जग जाहिर है। लेकिन हाल के दिनों में मंत्रालय बदले जाने से खफा सिद्धू ने इस्तीफा दे दिया। सबसे पहले सिद्धू ने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष को भेजा,  लेकिन अपने इस्तीफे में उल्झे राहुल ने सिद्धू के इस्तीफे पर कुछ खास दिलचस्पी नहीं दिखाई, जिसके बाद सिद्धू अपना इस्तीफा कैप्टन को भेजा। जिसपर पिछले काफी समय से जारी असमंजस के बाद कैप्टन ने सिद्धू का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।

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