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दूर रह कर भी ‘अरुण’ से दूर नहीं रह सके मोदी, थे जिगरी यार

नोएडा : अगस्त...5 अगस्त...8 अगस्त...15 अगस्त...ये तीन दिन भारतीय इतिहास के क्रांतिकारी बदलाव के दिन है। 5 अगस्त 2019 को भारत, मौत की धारा 370 से आजाद हुआ, 8 अगस्त 1942 को भारत ने अंग्रेजों का मोह भंग किया और 15 अगस्त को आजादी मिली, जब पूरा भारत जश्न में डूबा होता है। लेकिन इसी अगस्त महीने ने देश की सत्ताधारी भाजपा के कई महारथी छीन लिए। तभी तो 2995 किलोमिटर दूर बहरीन से भी मोदी को अगस्त महीना याद आ गया...  

पीएम मोदी विदेश में देश की कड़ियां जोड़ रहे थे और देश में उनका एक साथी मोह-माया से दूर चला गया। भाजपा का अरुण अस्त हो गया। सूरज डूब गया, लेकिन मजबूर मोदी अपने चहते दोस्त के अंतिम दर्शन से वंचित रह गए। श्रद्धांजलि भी कोसो दूर से देनी पड़ी।

जेटली बीजेपी के कवच नहीं अवेध कवच थे, जब गेंद आया या तो बाउंड्री या विरोधियों की गिल्लियां उड़ा दी। वकालत और सियासत के दुनिया के बेताज बादशाह जेटली खेल की दुनिया से भी काफी कनेक्टेड रहे। 

DDCA अध्यक्ष और BCCI उपाध्याक्ष रहे जेटली अटल से लेकर मोदी तक की सरकारों में बड़ी भूमिका में रहे। वह जनाधार के बिना भी राजनीति में अपरिहार्य रहने के मिशाल थे। वह भाजपा की रीढ़ थे। मोर्चा चाहे कानून का हो या संसद का या फिर सवाल पर सवाल दागने वाली मीडिया का ही क्यों न हो, जेटली सधे अंदाज में सजे लहजों के सब कायल रहे।

लेकिन अब ये आवाज हमेशा-हमेशा के लिए खामोश हो गया, रह गई तो बस यादें।  लेकिन अगस्त महीने में ये भाजपा की तीसरी याद है जो मोह-माया से मुक्त हो गए। अगस्त महीना भाजपा को इसी तरह हर बरस पुरानी यादें ताजा करता रहेगा। इसी महीने की 6 अगस्त को देश ने नारी शक्ति का उदाहरण, महिलाओं की पहचान, पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज खो दिया। इसी अगस्त महीने के 16 अगस्त 2018 में भारत और भाजपा ने अपना रत्न अटल खो दिया। जिनकी यादें आज भी रूला जाती है।

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