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अबकी बार दिन में ही चांद के पार चला इंडिया

नोएडा : तो यही है वो तस्वीर, जिसके के इंतजार में पूरा देश पलक-पावड़े सजाए बैठा था और जब आई तो पूरा हिंदुस्तान गद्गद्... गर्व से लवा-लव भर देने वाली ये तस्वीरें मीशन मून की है, जिसे सफल बनाने में इसरों के सैकड़ों वैज्ञानिकों ने सप्ताह भर से अपने घर का द्वार नहीं देखा, बच्चों का प्यार नहीं पाया, लेकिन अब पूरे देश का प्यार बंटोर रहे हैं।

सालों से जारी इंतजार, सफलता और असफलता के संघर्ष से गुजरते हुए भारत का चंद्रयान-2 आखिरकर अपने ऐतिहासिक सफर पर उड़ चला। 15 जुलाई 2019 को उस वक्त देशवासियों को तगड़ा झटका लगा था जब तकनीकी खामियों के कारण निर्धारित समय से महज 56 मिनट पहले मिशन मून पर ब्रेक लगा था। तब देश की फिज़ा में ऐसी खबरे तैर रही थी कि अब इस मिशन के लिए महीनों इंतजार करना होगा, लेकिन इसरों के निष्ठावान वैज्ञानिकों ने सप्ताह भर के भीतर ही इत कठिन मर्ज का दवा खोज निकाला।

15 जुलाई की असफलता से नई सीख लेते हुए इसरों के धुंरधरों ने पूरी तैयारी के साथ इस बार रात के बजाए दिन में ही चांद पर सटिक निशाना लगा और भारत का झंडा एक और बार बुलंद कर दिया।

गर्व से भर देने वाली इन तस्वीरों को देखिए, और ये पल आंखों में कैद रहनी चाहिए। अंधेरे को चीरते हुए अंतरिक्ष का बाहुबली gslv मार्क 3 रॉकेट सपनों की उड़ान पर उड़ गया और अपने साथ ले गया भारत का मिशन मून।  चंद्रयान-1 की कामयाबी के बाद इसरो चंद्रयान-2 के जरिए फिर से इतिहास रचने की ओर बढ़ रहा है। चन्द्रयान-2 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया, जो करीब देढ़ महीने की यात्रा के बाद चांद पर लैंड करेगा।

आपको बता दें कि चंद्रयान-2 मिशन चंद्रयान 1 के अधूरे कार्यों को पूरा करेगा। इससे पहले भारत ने साल 2008 में चंद्रयान-1 लांच किया था, लेकिन तब भारत का यान चंद्रमा की सतह पर लैंड कर पाने में असफल रहा था। लेकिन अबकी बार चंद्रायान न सिर्फ चंद्राम की सतह पर लैंड करेगा बल्कि चांद की सतह और सतह के नीचे व बाहरी वातावरण की भी पड़ताल करेगा।

एक साल के मिशन पर रवाना हुआ भारत का चंद्रयान-2, चांद की सतह की तथ्यों का अध्यन करेगा, चांद पर मौसम का हाल बताएगा, चांद पर मौजूद खनिजों का पता लगाएगा, चांद की मिट्टी का अध्यन करेगा, पानी का पता लगाएगा, यूं कहे की चांद का नक्शा जमीन पर भेजेगा। इस मिशन के सफल होने के बाद अब भारत चांद पर मानव रहित यान भेजने वाला चौथा देश बन जाएगा।

वैसे भारत से पहले तीन देशों ने ऐसा कर दिखाया है, लेकिन भारत का मिशन अन्य देशों के मुकाबले काफी अहम है। भारत का चंद्रयान चांद के दक्षिणी धुव्र पर उतरेगा, जहां अब तक किसी देश ने उतरने की हिम्मत नहीं दिखाई, क्योंकि ये खतरे से खाली नहीं है। इस इलाक़े से जुड़े जोखिमों के कारण कोई भी अंतरिक्ष एजेंसी वहां नहीं उतर सकी है। अधिकांश मिशन भूमध्यरेखीय क्षेत्र में गए जहां दक्षिण धुव्र की तुलना में सपाट जमीन है। जबकि दक्षिणी ध्रुव ज्वालमुखियों और उबड़-खाबड़ जमीन से भरा हुआ है।

इस मिशन पर भेजे गए स्पेसक्राफ्ट के तीन हिस्से हैं, जिनमें से एक ऑर्बिटर और दूसरा लैंडर जिसे भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर विक्रम रखा गया है, जबकि तीसरा छह पहियों वाला एक रोबोट रोवर है। इसरो द्वारा निर्मित इस रोबोट को प्रज्ञान का नाम दिया गया है, जो चांद की सतह पर भ्रमण कर जानकारियां जुटाएगा और ऑर्बिटर चांद के आसपास चक्कर लगाएगा जबकि लैंडर चांद के दक्षिणी धुव्र के पास सुरक्षित और नियंत्रित लैंडिंग करेगा।

इसरों के इस सफल कामयाबी के बाद देश भर में खुशी का माहौल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश की जनता अपने निष्ठावान वैज्ञानिकों की हौसला अफाजाई करते नहीं थक रहे हैं...

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