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ब्रिटिश मीडिया ने कसा भारत पर तंज, कहा कर्ज लेकर भारत में हो रहा मूर्ति निर्माण

नई दिल्ली : विश्व की सबसे उंची मूर्ति बनाकर भारत ने जहां विश्व पटल पर अपना एक पहचान बनाया है। वहीं ब्रिटिश मीडिया ने भारत के इस मूर्ति निर्माण पर तंज कसा  हैं। आपको बता दें कि गुजरात में सरदार पटेल की 182 मीटर ऊंची मूर्ति बनी है, जो कि विश्व का सबसे ऊंची मूर्ति हैं।  गुजरात में बनी दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा 'स्टैचू ऑफ यूनिटी' की जहां दुनिया भर में चर्चा हो रही है वहीं ब्रिटेन की मीडिया ने सरदार पटेल की इस मूर्ति के बनने की निंदा की है। इसके साथ हीं उन्होंने दावा किया कि जिस बीच भारत यह मूर्ति बना रहा था उस बीच ब्रिटेन ने भारत को करीब एक अरब पाउंड की आर्थिक मदद दी। बता दें कि ब्रिटेन द्वारा बताई जा रही यह राशी पटेल की मूर्ति पर आए खर्च से कहीं ज्यादा है। खबर में एक सांसद यह भी कहा है कि ब्रिटेन को अब भारत की मदद नहीं करनी चाहिए।

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ब्रिटेन की वेबसाइट, डेली मेल में इसका जिक्र है। खबर में यह साफ लिखा है कि ब्रिटेन के करदाताओं का पैसा प्रत्यक्ष रूप से मूर्ति निर्माण में नहीं लगा बल्कि भारत में हुए विभिन्न विकास कार्यों में लगा है। लेकिन अगर भारत अपना पैसा मूर्ति बनाने में खर्च नहीं करता तो उन प्रॉजेक्ट्स का खर्च खुद उठा सकता था। खबर में भारत को तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बताया गया है जो मंगल तक पहुंच गई है। लिखा गया है कि भारत को जितनी आर्थिक मदद मिलती है, उससे कई गुना ज्यादा की मदद वह खुद दूसरे देशों की करता है। ऐसा लिखकर ब्रिटेन द्वारा भारत को मदद देने का विरोध किया गया है। आगे दावा किया गया है कि यूके ने भारत को 2012 में 300 मिलियन, 2013 में 268 मिलियन, 2014 में 278 मिलियन और 2015 में करीब 185 मिलियन की आर्थिक मदद दी थी।

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खबर में यूनाइटेड किंगडम के सांसद पीटर बोन का भी जिक्र है। जो कहते हैं, 'एक तरफ हमसे 1.1 अरब पाउंड की मदद ली गई और तब ही मूर्ति बनाने के लिए 330 मिलियन पाउंड खर्च कर दिए गए। यह बिल्कुल बकवास है और ऐसी चीज लोगों को पसंद नहीं आती।' खबर के अनुसार, बोन ने आगे कहा कि यह दिखाता है कि भारत अपने पैसे कैसे खर्च करता है। अगर भारत ऐसी मूर्ति बना सकता है तो यह साफ है कि हमें उनकी मदद नहीं करनी चाहिए।

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