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राजीव गांधी की बचाई थी जान, आज ईट के भट्ठे पर मजदूरी करने को मजबूर...

NEW DELHI:- हरियाणा महेंद्रगढ़ की कनीना तहसील के गांव पोटा निवासी भरत सिंह ने श्रीलंका दौरे के समय भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को श्रीलंकाई सैनिक द्वारा राइफल का बट मारने की रची गई साजिश को नाकाम कर दिया था  और राजीव गांधी की जान अपने जान पर खेलते हुए बचाई थी । इन्हे शांति पुरूस्कार तो मिला पर इनके परिवार के पेट को शांती नहीं मिली क्योकि इन्हे आज तक भारत सरकार की तरफ से पेंसन भी नहीं मिल रही है ।

मीडिया के सामने यह दर्द उस वक्त सामने आया जब हांसी के इतिहासकार जगदीश सैनी ने अपने प्लाट पर निर्माण कार्य शुरू किया । कार्य के दौरान मिस्त्री ने एक मजदूर को कौजी कहकर पुकारा ।

इस पर जगदीश सैनी ने कौजी पुकारे जाने वाले से पूछा कि आप को कौजी क्यों कहते हैं ? इतना कहते ही यह पूर्व सैनिक रो पड़ा और रोते हुए अपनी जो दास्तां सुनाई उसे सुनकर हर किसी के रोंगटे खड़े हो गए ।

भरत सिंह हिसार के हांसी कस्बे में इतिहासकार जगदीश सैनी के निर्माणाधीन प्लाट पर ईंटें ढो रहे है। इतिहासकार जगदीश सैनी ने सरकार और सेना से गुहार लगाई है कि देश के इस बहादुर पूर्व सैनिक की सुध ली जाए और उससे धोखा करने वालों पर कार्रवाई करके उसका हक दिलाया जाए । पर हर मुद्दों पर राजनीति करने वाले राहुल गांधी औऱ सोनिया के साथ पूरे कांग्रेस के कानो में आज तक जू तक नहीं रेंगी ।

सवाल तो यह खड़ा होता है कि जब ये परिवार जब अपने पिता - पति की जान बचाने वाले को अधिकार नहीं दिला पाया तो ये रायबरेली और अमेठी वालो के लिए क्या करेगा ?  

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